चंद अशआर : शेर शायरी

#1 लगी है शर्त मेरी आज फिर ज़माने से।
   रोक सकता है मुझे कौन मुस्कुराने से।।



#2 कभी दिन में तो कभी रात में आ जाता है।
कभी ख़्वाहिश कभी जज़्बात में आ जाता है।।
लाख समझाऊँ, करूँ कोशिशें भुलाने की।
नाम उसका मेरी हर बात में आ जाता है।।



चंद अशआर, शेर शायरी, दर्द भरी शायरी














#3 बेचैनी का आलम कब तक साथ चलेगा।
उसका साया कब तक मेरे साथ चलेगा।।
बीत गयीं जो बातें, लम्हे गुजर गए।
उन लम्हों का मंज़र कब तक साथ चलेगा।।



#4 ये दिल में दर्द कैसा है, क्यों आँखों में नमी सी है।
मैं क्यों बेचैन रहता हूँ, मुझे किसकी कमी सी है।।
किताबे दिल के पन्नों पर मोहब्बत सा है कुछ शायद।
फलक पे कुछ धुआँ सा है, ज़मीं कुछ कुछ थमीं सी है।।


बालकृष्ण द्विवेदी 'पंकज'
+91-9651293983
चंद अशआर : शेर शायरी चंद अशआर : शेर शायरी Reviewed by Bal krishna Dwivedi on 8/09/2014 Rating: 5

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